बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता काफी पुराना और डरावना रहा है। अस्सी और नब्बे के दशक में दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी और अबू سالم जैसे गैंग्स का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा प्रभाव था। उस दौरान रंगदारी, हिंसा और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अंडरवर्ल्ड फिल्मों में दखल देता था।
गुलशन कुमार की हत्या और अन्य बड़ी वारदातें
1997 में टी-सीरीज के संस्थापक और संगीत जगत के दिग्गज गुलशन कुमार की सरेआम हत्या कर दी गई थी। उन पर 16 गोलियां चलाई गई थीं क्योंकि उन्होंने रंगदारी देने और अंडरवर्ल्ड की कंपनियों को राइट्स बेचने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा फिल्म निर्माता राकेश रोशन और राजीव राय पर भी जानलेवा हमले हुए थे।
फिल्मों को फाइनेंसिंग की कमी और अंडरवर्ल्ड का फायदा
2000 से पहले भारतीय सिनेमा को इंडस्ट्री का दर्जा नहीं मिला था, जिससे बैंक फिल्मों को फंडिंग नहीं करते थे। ऐसे में निर्माताओं को दुबई और कराची से ऑपरेट करने वाले गैंगस्टर्स से पैसे लेने पड़ते थे। सितारे उनकी पार्टियों में जाते थे, जिससे इंडस्ट्री की छवि को भी नुकसान पहुंचा था।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ अंडरवर्ल्ड का नया दौर
वक्त के साथ जब कॉर्पोरेट स्टूडियो और लीगल फंडिंग आई, तो अंडरवर्ल्ड का असर कम हुआ। लेकिन अब लॉरेंस बिश्नोई जैसे नए गैंग्स ने बॉलीवुड को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग और अन्य सितारों को मिल रही धमकियां इस बात का प्रमाण हैं कि खतरा अभी टला नहीं है।
