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Ajay Devgn ने Vimal Elaichi विज्ञापन विवाद पर Maharashtra FDA के नोटिस के खिलाफ Bombay High Court का रुख किया

अजय देवगन ने विमल इलायची विज्ञापन विवाद में महाराष्ट्र एफडीए के नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

Ajay Devgn ने Vimal Elaichi विज्ञापन विवाद पर Maharashtra FDA के नोटिस के खिलाफ Bombay High Court का रुख किया

बॉलीवुड अभिनेता Ajay Devgn ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी Maharashtra FDA द्वारा जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला विमल इलायची के एक विज्ञापन में उनके नजर आने से जुड़ा हुआ है। अभिनेता ने 30 अक्टूबर को अपनी याचिका दायर की है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका

रिपोर्ट के अनुसार, अजय देवगन ने एफडीए के नियमों की संवैधानिकता को चुनौती दी है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि यह नोटिस सीधे उन्हें क्यों भेजा गया, जबकि इसे निर्माण करने वाली कंपनी को भेजा जाना चाहिए था। अभिनेता का तर्क है कि वह अब इस ब्रांड से जुड़े हुए नहीं हैं, इसलिए उन्हें इन कार्रवाइयों का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ द्वारा सुनवाई किए जाने की संभावना है।

Maharashtra FDA का पक्ष

मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने कहा था कि अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ के खिलाफ कार्यवाही पूरी हो चुकी है। इन तीनों अभिनेताओं ने नोटिस का जवाब दिया था, और विभाग को इसमें नियम उल्लंघन मिले। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अजय देवगन के हाईकोर्ट जाने से एफडीए को आगे की कार्रवाई करने से नहीं रोका जा सकता है।

क्यों जारी किए गए थे नोटिस?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब एफडीए ने इन तीनों अभिनेताओं के विमल इलायची का प्रचार करने वाले विज्ञापनों पर आपत्ति जताई। विभाग का दावा था कि हालांकि उत्पाद को इलायची के रूप में दिखाया गया था, लेकिन विमल ब्रांड पान मसाला से गहराई से जुड़ा हुआ है। आरोप लगाया गया कि इन विज्ञापनों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से विमल पान मसाला का प्रचार किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है।

11 अगस्त को एफडीए ने अभिनेताओं को नोटिस जारी कर इस अभियान में भाग लेना बंद करने, सोशल मीडिया से प्रचार पोस्ट हटाने और उत्पाद का समर्थन करने से पहले अपने समझौतों व जांच का विवरण साझा करने को कहा था। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धाराओं के तहत भ्रामक विज्ञापनों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

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